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अमरोहा: शबनम की दया याचिका खारिज होने पर चाचा-चाची खुश, बोले- फांसी के बाद नहीं लेंगे डेडबॉडी

अमरोहा: शबनम की दया याचिका खारिज होने पर चाचा-चाची खुश, बोले- फांसी के बाद नहीं लेंगे डेडबॉडी
एमपीदुनिया न्यूज़, लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अमरोहा (Amroha) जिले के बावनखेड़ी गांव में अपने परिवार के सात सदस्यों को मौत के घाट उतारने वाली शबनम (Shabnam) और उसके प्रेमी सलीम (Saleem) की फांसी की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा. इसके बाद राष्ट्रपति ने शबनम और सलीम की दया याचिका खारिज कर दी है. इस फैसले के बाद शबनम के चाचा और चाची सहित पूरे गांव में खुशी का माहौल है. शबनम की चाची कहती हैं कि हमें तो खून का बदला खून ही चाहिए. इसे फांसी जल्द हो जाए. चाची ने कहा कि उस समय अगर हम भी घर में होते तो हम भी इसने मार डाला होता. हम घटना के बाद आधी रात में यहां पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि याचिका खारिज हो गई, हम तो बहुत खुश हैं. अच्छा किया सरकार ने इसे फांसी होनी चाहिए. वहीं फांसी पर चढ़ाए जाने के बाद क्या डेडबॉडी लेंगीं? इस सवाल के जवाब में चाची ने कहा कि हम क्यों लेंगे? हम नहीं लेंगे. हम क्या करेंगे ऐसी लड़की की लाश लेकर? वहीं चाचा ने कहा कि हम उस समय यहां नहीं थे. रात में दो बजे के बाद मौके पर पहुंचे थे, सब कटे हुए पड़े थे. इसने जो किया है, वो ही भरना है. उन्होंने कहा कि दूसरा देश होता तो इसे बहुत पहले ही फांसी हो जाती. ये है पूरा मामला पूरा मामला 14/15 अप्रेल 2008 का है. हसनपुर तहसील के गांव बावनखेड़ी के रहने वाले मास्टर शौकत अली की बेटी शबनम ने गांव के ही प्रेमी सलीम की खातिर अपने माता-पिता समेत परिवार के 7 सदस्यों को कुल्हाड़ी से काटकर मौत के घाट उतार दिया था. बाद में नाटकीय ढंग से रोने लगी. शबनम गांव के ही स्कूल मे शिक्षा मित्र थी. शबनम पठान बिरादरी से ताल्लुक रखती थी, वहीं उसका प्रेमी सलीम सैफी बिरादरी से था, जिससे शबनम के परिवार को दोनों के प्रेम में बाधा आ रही थी. घटना की काली रात में सोने से पहले शबनम ने अपने परिवार को चाय में नशे के गोलियां खिलाकर उनको सुला दिया. उसके बाद अपने प्रेमी को फोन करके घर में बुलाकर परिवार के 7 सदस्यों की हत्या कुल्हाड़ी से काट कर दी. 2010 में हुई थी फांसी की सजा घटना का खुलासा होने के बाद से ही शबनम और उसका प्रेमी सलीम मथुरा की जेल की सलाखों के पीछे हैं. इनके मुकदमे की सुनवाई के बाद अमरोहा की जिला अदालत ने 2010 में दोनों को फांसी की सजा सुनाई थी, जिसको उच्च न्यायालय से लेकर उच्चतम न्यायालय तक ने बरकरार रखा. अब देश के राष्ट्रपति ने भी शबनम और सलीम की दया याचिका ख़ारिज कर दी है. इस सुनवाई से फांसी की सजा से गांव के लोगों में ख़ुशी का माहौल है. आजाद भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा होने जो रहा है, जब किसी महिला कैदी को फांसी पर लटकाया जायेगा. मथुरा जेल में स्थित उत्तर प्रदेश के इकलौते महिला फांसी घर में अमरोहा जनपद के गांव बाबनखेड़ी की रहने बाली सबनम को मौत की सजा दी जाएगी.

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