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कृषि कानून ,कानून में सुधार और कृषि मंडियों की स्थिति और किसान*.

कृषि कानून ,कानून में सुधार और कृषि मंडियों की स्थिति और किसान*.
* राजपाल सिंह परिहार (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में IND24 मन्दसौर जिला संवाददाता) मध्यप्रदेश में 1972 में मंडी एक्ट मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री प्रकाशचंद्र सेठी लेकर आये थे , वही कई राज्यो में अलग अलग तरीको से कृषि उपजो और उत्पादों को खरीदने ओर बैचने का तरीका अपनाया जाता रहा है , अट्ठारह से अधिक राज्यो में पहले से ही खुला व्यापार होता आया है । यहाँ तक कि बिहार में खुली बिक्री का कई बिचोलिये बिहार से कमोडिटी की खरीद फरोख्त कर पास के राज्यो में एमएसपी पर किसान बन बेच देते है । 1972 में सुधार करते हुए कृषि को दलालों आढ़तियों के शोषण से मुक्त कराने के कड़े प्रबंध ओर प्रावधान किये गए थे जिसमे खुले में प्रतिस्पर्धात्मक उचित मूल्य तय होता था ,खुले में नीलामी मूल्य तय होता था मंडी प्रांगण में खरीद होती थी । हम्माल ,तुलावटी,व्यपारी,किसान, कर्मचारियों,ओर छोटे मोटे दुकानदारों का मिलाजुला एक बाजार जिससे APMC का निर्माण होता है , इन संस्थाओं से रोजगार के साथ शुल्क संग्रहण किया जाता है और इस शुल्क को विंभिन्न प्रयोजनो पर व्यय किया जाता है पंजाब मंडी बोर्ड का उदाहरण तो अनुकर्णीय है ग्रामीण सड़को का निर्माण,चिकित्सा और पशु चिकित्सा,औषधालय चलाने ,पीने के पानी की आपूर्ति,स्वछता में सुधार,आपदाओं से निपटने सहित ग्रामीण विद्युतीकरण में किसान और जनता के हितों में लगाया जाता है । मध्यप्रदेश में भी व्यापारीयो से निराश्रित शुल्क लिया जाता है ओर सड़क निधि से किसान हितों में सड़कों का निर्माण मंडीयो द्वारा मंडी बोर्ड से करवाया जाता है । सरकारी आकड़ो के मुताबीक देश मे 2477 बड़ी AMPC (कृषि उपज एवम बाजार समिति) है जबकी 4843 उप APMC है । जबकि कृषि सुधारो के लिए UPA सरकार के बनाये गए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के मुताबीक देश मे 42000 मंडियों की आवश्यकता बताई गई है । बजट में 2021-22 के लिए कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए 148,301 करोड़ रुपयों का बजट आबंटित किया है वही सरकार की फ्लैगशिप स्किम प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लिए 65000 करोड़ रुपयों के आबंटन के साथ एक लाख करोड़ के ऐग्रीनफ्रास्ट्राचर फंड जिसमे पहले मंडिया नही हुआ करती थी अब इस बजट में से कृषि मंडिया भी धन अपने विकास के लिए ले पाएगी, जो 2 फरवरी से लागू है । वित्त मंत्री के अभिभाषण अनुसार एक हजार मंडियों को eNAM में सम्मिलित किया गया है । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का सपना 2022 तक किसान की आय दोगुना करने के लिए तीन स्तर पर कार्य करना है जिसमे उत्पादन लागत में कमी,कृषि आधारीत कुटीर उद्योग एवं क्रियाकलापो को प्रोत्साहन ओर तीसरा विपणन हेतु प्रतिस्पर्धात्मक बाजार का सृजन करना है । कृषि बाजार पर सरकारी एकाधिकार को समाप्त करने को लेकर कृषि मंत्रालय द्वारा मॉडल एक्ट ऑनलाइन एग्रीकल्चर मार्केटिंग लाया गया जिसमें किसान प्रत्यक्ष विपणन में सलग्न होंगे ,बिचौलियों का सफाया होगा,जिसके परिणामस्वरूप मूल्य की पूर्ण वसूली होगी । FPTC 2020 (FARMER PRODUCE TRADE AND COMARCE ACT 2020) निजी क्षेत्रों के निवेश को आकर्षित करता है राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों के निवेश को आकर्षित करने के लिए उत्प्रेरक माना जा रहा है । वही आवश्यकता वस्तु अधिनियम 1955 में संशोधन करते हुए भंडारण की सीमा को समाप्त किया गया । कृषक (शसक्तीकरण व संरक्षण ) कीमत आस्वाशन ओर कृषि सेवा पर करार कानून 2020 कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग लाया गया है । आधिकारिक आकड़ो से पता चलता है धान ओर गेंहू क्रमश मंडी में केवल 29 % ओर 44% फसल बैची जाती है जबकी 49% ओर 36 % या तो स्थानीय या निजी व्यपारियो को बैची जाती है । भारत मे 86 % भूमि पर छोटे और सीमांत किसानों का स्वामित्व है जो मंडी तक परिवहन करने के बजाय स्थानीय व्यापारियों को उपज बेच देते है । कानून में MSP निर्धारित नही होने का हवाला देते हुए और छोटे किसानों का भुगतान अगर रुक गया और कारपोरेट घरानों के एक तरफा व्यापार की आशंकाओं को लेकर विरोध जताया जा रहा है वही सरकार ये कह रही है की MSP भी रहेगा और शासकीय खरीद भी होगी । मगर निम्न स्तर की उप मंडियों के कर्मचारियों हम्माल तुलावटी ओर दुकानदारों को अब अपना ओर कोई व्यवसाय खोजना होगा ।

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